अंतिम विदाई में सम्मान दिलाने में हमारी मदद करें
हर इंसान सम्मान का हकदार है — सिर्फ जीवन में ही नहीं, बल्कि अपनी अंतिम विदाई में भी।
हम यह फंड उन गरीब और जरूरतमंद परिवारों की मदद के लिए जुटा रहे हैं जो अपने प्रियजन के अंतिम संस्कार का खर्च उठाने में असमर्थ हैं। रोज़ हमें ऐसे दर्दनाक दृश्य देखने को मिलते हैं जहाँ परिवार लकड़ी, वाहन, पंडित जी या अंतिम संस्कार की मूल सामग्री तक की व्यवस्था नहीं कर पाते।
एक गरीब परिवार के लिए ₹8,000 से ₹20,000 तक का अंतिम संस्कार खर्च उस समय बहुत बड़ी राशि बन जाता है, जब वे पहले से ही गहरे दुःख में डूबे होते हैं।
जब किसी अपने का निधन होता है, परिवार भावनात्मक रूप से टूट जाता है। लेकिन दुख के साथ-साथ आर्थिक बोझ भी आ जाता है। कई बार:
हमने स्वयं एक परिवार को श्मशान घाट पर असहाय बैठा देखा, क्योंकि उनके पास चिता के लिए लकड़ी खरीदने तक के पैसे नहीं थे। उस दृश्य ने हमें अंदर तक झकझोर दिया।
किसी भी परिवार को अपने सबसे कठिन समय में मदद के लिए हाथ फैलाने पर मजबूर नहीं होना चाहिए। इसीलिए हमने यह अभियान शुरू किया — ताकि गरीबी कभी भी किसी की अंतिम विदाई के सम्मान के बीच न आए।
आपकी दी गई हर राशि सीधे इन कार्यों में खर्च की जाएगी:
आपका छोटा सा योगदान किसी के लिए बहुत बड़ा सहारा बन सकता है
आइए, हम सब मिलकर सुनिश्चित करें कि कोई भी व्यक्ति इस दुनिया से बिना सम्मान के विदा न हो।
कृपया Donate बटन पर क्लिक करें और इस पुण्य कार्य का हिस्सा बनें।
हर इंसान सम्मान का हकदार है — सिर्फ जीवन में ही नहीं, बल्कि अपनी अंतिम विदाई में भी।
हम यह फंड उन गरीब और जरूरतमंद परिवारों की मदद के लिए जुटा रहे हैं जो अपने प्रियजन के अंतिम संस्कार का खर्च उठाने में असमर्थ हैं। रोज़ हमें ऐसे दर्दनाक दृश्य देखने को मिलते हैं जहाँ परिवार लकड़ी, वाहन, पंडित जी या अंतिम संस्कार की मूल सामग्री तक की व्यवस्था नहीं कर पाते।
एक गरीब परिवार के लिए ₹8,000 से ₹20,000 तक का अंतिम संस्कार खर्च उस समय बहुत बड़ी राशि बन जाता है, जब वे पहले से ही गहरे दुःख में डूबे होते हैं।
जब किसी अपने का निधन होता है, परिवार भावनात्मक रूप से टूट जाता है। लेकिन दुख के साथ-साथ आर्थिक बोझ भी आ जाता है। कई बार:
- परिवार ऊँचे ब्याज पर कर्ज लेता है।
- पैसों की कमी के कारण अंतिम संस्कार में देरी होती है।
- गरीबी के कारण पूरे रीति-रिवाज नहीं हो पाते।
- कुछ परिवार मजबूरी में परंपराएँ छोड़ देते हैं।
हमने स्वयं एक परिवार को श्मशान घाट पर असहाय बैठा देखा, क्योंकि उनके पास चिता के लिए लकड़ी खरीदने तक के पैसे नहीं थे। उस दृश्य ने हमें अंदर तक झकझोर दिया।
किसी भी परिवार को अपने सबसे कठिन समय में मदद के लिए हाथ फैलाने पर मजबूर नहीं होना चाहिए। इसीलिए हमने यह अभियान शुरू किया — ताकि गरीबी कभी भी किसी की अंतिम विदाई के सम्मान के बीच न आए।
आपकी दी गई हर राशि सीधे इन कार्यों में खर्च की जाएगी:
- चिता की लकड़ी खरीदने में
- कफन, फूल, घी और अन्य पूजन सामग्री में
- श्मशान घाट शुल्क में
- पंडित जी की सेवा शुल्क में
- शव वाहन की व्यवस्था में (यदि आवश्यकता हो)
- विद्युत शवदाह गृह के शुल्क में (जहाँ लागू हो)
आपका छोटा सा योगदान किसी के लिए बहुत बड़ा सहारा बन सकता है
- ₹500 से पूजन सामग्री में मदद हो सकती है।
- ₹2,000 से चिता की लकड़ी की व्यवस्था हो सकती है।
- ₹5,000–₹10,000 से एक पूरे अंतिम संस्कार का खर्च उठाया जा सकता है।
आइए, हम सब मिलकर सुनिश्चित करें कि कोई भी व्यक्ति इस दुनिया से बिना सम्मान के विदा न हो।
कृपया Donate बटन पर क्लिक करें और इस पुण्य कार्य का हिस्सा बनें।
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